वीथी

हमारी भावनाएँ शब्दों में ढल कविता का रूप ले लेती हैं।अपनी कविताओं के माध्यम से मैंने अपनी भावनाओं, अपने अहसासों और अपनी विचार-धारा को अभिव्यक्ति दी है| वीथी में आपका स्वागत है |

Thursday, 14 November 2013

हाइकु बाल-दिवस



शुभ बाल-दिवस ! बच्‍चों के लिए स्‍नेह और संवेदना के साथ हाइकु कविता........

क्या चाहता मैं
बाल-दिवस पर
मेरी सुनो जी ।

मम्मी-पापा जी

तोहफ़ों का लालच
बंद करो जी ।

अपना साथ
थोड़ी ममता-प्यार
मुझको दो जी ।

सुबह-शाम
मायूसी में कटतीं
किसे बताऊँ ?

दोपहर मैं
जब स्कूल से आऊँ
तुम्हें न पाऊँ ।

कितनी रातें
राह तकता रहूँ
और सो जाऊँ ।

सुबह जगूँ
तुम्हें सोता ही छोड़
स्कूल आ जाऊँ ।

मैगी-नूडल
नहीं चाहिए मुझे
पक गया हूँ ।

दोस्तों के डब्बे
स्वाद-सुगंध लाएँ
मुँह में पानी !

पूरी-पराँठे
साथ सब्ज़ी-अचार
मुझको दो जी ।

रूखी-सूखी है
क्यों छोटी-सी ज़िंदगी
तुम सोचो जी !

- सुशीला श्योराण






5 comments:

  1. बहुत सुंदर

    मित्रों कुछ व्यस्तता के चलते मैं काफी समय से
    ब्लाग पर नहीं आ पाया। अब कोशिश होगी कि
    यहां बना रहूं।
    आभार

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (15-11-2013) को "आज के बच्चे सयाने हो गये हैं" (चर्चा मंचःअंक-1430) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. सुन्दर बाल हाइकू

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